रणभेरी बज उठी है — बढ़ रहा भारत महान
रणभेरी बज उठी है, गूँज उठा हिन्दुस्तान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
यह वही धरा जहाँ शिवाजी की तलवार चमकी थी,
जहाँ महाराणा की प्रतिज्ञा पर्वत बनकर दमकी थी।
राणा की वह आन हमारी, लक्ष्मीबाई की शान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
अब सीमा पर शेर दहाड़ें भारत माँ के लाल हैं,
सीना ताने खड़े जवान, अडिग हिमालय ढाल हैं।
थल, नभ, जल—तीनों रणभूमि में भारत बलवान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
आकाशों में गरज रहा अब स्वदेशी अभिमान है,
तेजस की हर उड़ान में नवयुग का अभियान है।
ब्रह्मोस की गर्जन सुनकर काँपे हर शैतान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
सागर की गहराई बोले—भारत मेरी जान है,
लहर-लहर पर अंकित अपना साहस और सम्मान है।
परमाणु प्रतिरोध की शक्ति अब अडिग प्रहरी समान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
हमने बुद्ध का संदेश दिया, हमने गीता गाई है,
शांति हमारी संस्कृति है, यही हमारी कमाई है।
किन्तु किसी ने आँख उठाई—उत्तर भी तूफ़ान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
सीमा पर जो दीप जले हैं, वे सैनिक की साँसें हैं,
उनके कारण सुरक्षित अपनी मंदिर, मस्जिद, काशी हैं।
उनके चरणों में झुक जाना ही सच्चा सम्मान है,
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
आओ ऐसा भारत गढ़ें, जिसका ऊँचा मस्तक हो,
ज्ञान, शक्ति, विज्ञान, शौर्य—हर क्षेत्र में उत्कर्ष हो।
हर बच्चे के स्वर में गूँजे—"भारत मेरी जान है",
विश्व-पटल पर लिख रहा, भारत नया विधान है।
गर्व से ऊँचा शीश उठाओ, तिरंगा अपनी शान है,
विश्वगुरु बनने निकला मेरा अमर हिन्दुस्तान है।
जय जवान! जय विज्ञान! जय भारत महान!
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