उसने मुझे मजाक में पागल कह दिया
फिर हमने शरिको से रिश्ता तोड़ लिया
ये हमारी ना समझी है उस गली गए
वो मिला फिर उसने मुंह मोड़ लिया
क्या करे हमें कुछ नहीं सुझाता
एक बात जो हमेशा दिल दुखाता
हमीं नहीं जो ग़म में रहते है
जो उससे मिला आँख से पानी छोड़ दिया
बेपरवाह हवा ने मुझे बिगाड़ दिया है
यूं ही मुझे आसमान पर चढ़ा दिया है
मैं तारे छूने ही वाला था कि
मेरी माँ ने मुझे ख़्वाब से उठा दिया है
हम डूबे तो समंदर ने किनारे नहीं आने दिया
रूठे तो फिर होठों पर फसाने नहीं आने दिया
एक वक्त हुआ उसने मुझे देखा नहीं
हमने भी खुदको कभी तस्वीरों में आने नहीं दिया
-ऐ .के. गौतम
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