जीवन की कुछ ऐसी उलझनें हैं,
जिन्हें सुलझाना अभी आवश्यक है।
समय ने जो गाँठें बाँध दी हैं,
उन्हें खोलना भी तो अनिवार्य है।
जब मिलेंगे तुमसे फिर कभी,
हर पीड़ा का हिसाब सुनाएँगे।
तेरे बिना कैसे बीता हर पल,
आँखों से नहीं, धड़कनों से बताएँगे।
ऐसा कोई स्वप्न नहीं देखा मैंने,
जिसमें तेरा आना न हुआ हो।
हर साँस में तेरा ही नाम बसा,
हर धड़कन ने तुझे ही छुआ हो।
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