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सरकार का गिरता स्तर

                
                                                         
                            लोकतंत्र का नाश हो रहा,
                                                                 
                            
जनता भूल गई अपना अधिकार।।

सरकार हो रही तानाशाह,
जवाबदेही भूल गया गणतंत्र।।

धर्म-मज़हब पर लड़वा-लड़वाकर,
निष्ठुर और निरंकुश बनती जा रही सरकार।।

शिक्षा नीति की व्याख्या देकर,
पैलेट गन, लाठी-डंडे पड़वाती सरकार।।

महिला सशक्तिकरण का भाषण देकर,
अश्लील हरकतें करते हैं अफसर।।

किसानों की आय दोगुनी के वादे,
रह गए क्या बस पन्नों में।।

बेरोज़गारी का हाल न पूछो,
कॉकरोच बता दिया युवाओं को।।

महंगाई का स्तर नापो,
भ्रष्टाचार की जड़ों को देखो।।

क्या यही बना है विकसित भारत?
या सच में बना है विकसित भारत?

हाँ, उन्नति हुई राष्ट्र की, मैं सहमत हूँ।
आलोचक नहीं,
मैं तो बस देश का चिंतक हूँ।।
- अजय प्रताप सिंह "तोमर"
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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