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राष्ट्र के लिए एक संकल्प

                
                                                         
                            राष्ट्र के लिए एक संकल्प. पश्चिम से आया तूफान,.छीन लिया भारत की उड़ान। बिखर गए उस झोंके में सब,.नहीं बची खुद की पहचान।।
                                                                 
                            
गोरे पहरेदारों ने लूटा,.भारत का हर सम्मान।
राजा, सेवक, निर्धन, अमीर,.हुआ जब सबका अपमान।.
चारों ओर गूँजा
एक स्वर,.अंग्रेजों, छोड़ो हिन्दुस्तान।
भगत सिंह, सुखदेव, आजाद ने,.खाईं अनगिनत गोलियाँ।
झाँसी की रानी, सुभाष आदि सब,.खेलीं खून की होलियाँ।
इन सब अमर सपूतों ने,.लौटाया भारत माँ की शान।
अब हम सब भी कर्तव्य निभाएँ,.छू लें अब नया आसमान।
धर्म, द्वेष, भेद-भाव छोड़कर,.देश को नित नव ओर बढ़ाएँ।
भारत माँ के गौरव को हम,.विश्वभर में आगे फैलाएँ।
शिक्षा, खेल, चिकित्सा, कला,.सभी दिशा में हो हमारा उत्थान।
अंतरिक्ष के उच्च स्तर पर,.लहराएँ तिरंगे की शान।
विश्वभर में चारों ओर,.गूँजे हमारा यशगान।
यह संकल्प सबमें फैले,.कि श्रेष्ठ है हमारा हिन्दुस्तान। लेखिका: आकृति
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2 महीने पहले

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