आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सत्य की गूँज

                
                                                         
                            जब भी किसी चौराहे पर, कोई सत्य की बात कहे,
                                                                 
                            
झुक जाती है ज़ालिम की तलवार, चाहे वो कितनी भी बहे।
एक अकेला सच का तिनका, तूफानों को मोड़ देता है,
झूठ के ऊंचे महलों को, पल भर में वो तोड़ देता है।
सत्य का दामन थामे रखना, यही धर्म का सार है,
इसके बिना तो ये दुनिया, बस शब्दों का व्यापार है।
जब तुम खड़े होगे सच के साथ, सीना तानकर बीच डगर,
जीत हमेशा न्याय की होगी, मिट जाएगा सारा डर।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर