जब भी किसी चौराहे पर, कोई सत्य की बात कहे,
झुक जाती है ज़ालिम की तलवार, चाहे वो कितनी भी बहे।
एक अकेला सच का तिनका, तूफानों को मोड़ देता है,
झूठ के ऊंचे महलों को, पल भर में वो तोड़ देता है।
सत्य का दामन थामे रखना, यही धर्म का सार है,
इसके बिना तो ये दुनिया, बस शब्दों का व्यापार है।
जब तुम खड़े होगे सच के साथ, सीना तानकर बीच डगर,
जीत हमेशा न्याय की होगी, मिट जाएगा सारा डर।
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