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स्वाभिमान का पंख

                
                                                         
                            आसमान में उड़ने के लिए पंखों की ज़रूरत नहीं,
                                                                 
                            
इरादे बुलंद हों तो फरिश्तों की हसरत नहीं।
मेरी मेहनत ही मेरा आसमां सजाती है,
मेरी कोशिश ही मुझे ऊंचाइयों पर ले जाती है।
मैं किसी पर निर्भर नहीं, मैं खुद में पूर्ण हूँ,
मैं खुद का फरिश्ता हूँ, मैं खुद में ही संपूर्ण हूँ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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