पढ़ते,लिखते,और खेलते बच्चे
“रो रो कर घर सर पर उठाये
नाच नाच कर दिल बहलाए
सब की आखो के चाँद सितारा कह लाये
बच्चे घर की रोनक दीपक और प्रकाश कहा लाये
कुछ को उमीद की किरण,ज्योति दिखलाये
बच्चे भविष्य की रौशनी बन कर
माँ बाप के सपनों की उड़न बन कर
बच्चे पढ़ लिख और खेल कर आशा की उमीद बन जाए
बच्चे पढ़ लिख और खेल कर आशा की उमीद बन जाए” ||
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X