करो देश का कुछ तो ख़याल।
पूछो इस सत्ता से यह सवाल।
क्यों देश में मची ये अंधेरगर्दी।
क्यों फैला है गरीबी का जाल।
घर ओ पेट तुम्हारे भरे हुए हैं।
किसने कमाया कितना माल।
रात दिन मेहनत हरिया करता।
क्यों फिर हरिया का बुरा हाल।
हर तरफ उठती हैं सिसकियाँ ।
कौन चला है यह "नवल" चाल।
- नवल किशोर "नवल"
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