आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

करो देश का कुछ तो ख़याल।

                
                                                         
                            करो देश का कुछ तो ख़याल।
                                                                 
                            
पूछो इस सत्ता से यह सवाल।

क्यों देश में मची ये अंधेरगर्दी।
क्यों फैला है गरीबी का जाल।

घर ओ पेट तुम्हारे भरे हुए हैं।
किसने कमाया कितना माल।

रात दिन मेहनत हरिया करता।
क्यों फिर हरिया का बुरा हाल।

हर तरफ उठती हैं सिसकियाँ ।
कौन चला है यह "नवल" चाल।
- नवल किशोर "नवल"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर