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बेरोज़गारी की मार

                
                                                         
                            बारहवीं करने के बाद से युवा अब एक ही आस लगाता है,
                                                                 
                            
टिक सके वो अपने पैरों पर इसलिए सरकारी जॉब चाहता है,
इस बढ़ती हुई जनसंख्या ने अब परिदृश्य देश का बदल दिया,
मानव ने अभिलाषाओं को क्यों मन- ही- मन में कुचल दिया,
बारहवीं करने.....................................चाहता है।।1।।

पहले कम लोग हुआ करते शिक्षित तब घर से उन्हें बुलाते थे,
बस सुई में धागा डलवाकर वो उन्हें चयनित अभ्यर्थी बताते थे,
आज स्नातक और परास्नातक भी कर कई लोग घरों में बैठे हैं,
अब आ जाएं भर्तियां जल्द सरकारी बस आस लगाए बैठे हैं,
बारहवीं करने......................................चाहता है।।2।।

जब जनसंख्या कम होगी तब फिर निर्धनता मर जाएगी,
शिक्षित होगा जब हर कोई तब देश में खुशहाली आएगी,
बेरोज़गारी और निर्धनता को अपने देश से हमें भागना है,
हर बालक को शिक्षित कर अब भारत को विश्वगुरु बनाना है,
बारहवीं करने......................................चाहता है।।3।।

- आदित्य यादव उर्फ़
'कुमार आदित्य यदुवंशी'
बरेली,उत्तर प्रदेश
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3 वर्ष पहले

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