मैं बिहार हूँ।
एक समय पहले हमारा साम्राज्य हुआ करता था,
चंद्रगुप्त का धर्मराज्य हुआ करता था।
करम बीते, साल बीते,
नेताओं के ख्याल बीते।
आज तो मैं बंजर के भाँति सूखा हूँ,
न जाने कितने दिनों से भूखा हूँ।
कालखंड की कोठरी में पड़े-पड़े
सूखे घास की भाँति रूखा हूँ।।
मैं बिहार हूँ।
नदियों के लिए परिवार हूँ,
इस देश के लिए बेकार हूँ।
वैसे तो जन्म से बुद्ध हूँ मैं,
पीपल के भाँति विशुद्ध हूँ मैं।
इस देश में कोई हमें इंसान समझे, तब तो बताऊँ,
कि बाकी इंसानों की तरह ही प्रबुद्ध हूँ मैं।।
मैं बिहार हूँ।
बाढ़ से छत्तीग्रस्त पड़ा रहता हूँ,
अपने चरण कमल पे खड़ा रहता हूँ।
मुझे पता है इस देश में इज्जत नहीं है हमारी,
फिर भी इस देश की सेवा में अड़ा रहता हूँ।।
इन सवालों के बाद मैं देशद्रोही कहलाऊँगा,
देशद्रोह के आरोप में जरूर जेल जाऊँगा।
मैं बिहार हूँ।
गरीबी की दहशत में रोज़ विश्राम करता हूँ,
हर चुनाव में इन नेताओं को सलाम करता हूँ।
हूँ मैं आम सा आदमी शायद इसलिए ही,
आज़ादी के उन्यासी साल बाद भी इस देश को झुक के प्रणाम करता हूँ।।
मैं बिहार हूँ,
शायद इसलिए लाचार हूँ,
अपने साथ हो रहे अपमान के लिए,
मैं खुद ज़िम्मेदार हूँ।
मैं बिहार हूँ,
शायद इसलिए गुनहगार हूँ,
अपने राज्य को छोड़कर
पूरे दुनिया के लिए असरदार हूँ।
मैं बिहार हूँ,
शायद इसलिए कर्ज़दार हूँ।
अपने राज्य की दुर्गति के लिए
खुद से ही शर्मसार हूँ।
मैं बिहार हूँ।
मैं बिहार हूँ।
मैं बिहार हूँ।
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