जीवंत शमशान सा
सुस्त घाट सा
तटस्त धार सा
मनचली गलियों सा
लबालब नुक्कड़ सा
विचलित धाराओं सा
शांत मन सा ,
बैठा है वो मेरे भीतर
बनारस सा ।
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