सावन आया, संग में लाया,
बूंदों का मधुर संगीत।
भीगी धरती, महके उपवन,
मुस्काने लगा हर एक मीत।
डाल-डाल पर झूले पड़ते,
मन नभ तक है उड़ जाता,
तीज का पावन पर्व सुहाना,
घर-आँगन को है महकाता ।
रिमझिम फुहारों की सरगम,
मन में नव उल्लास जगाए।
तीज और सावन का उत्सव,
जीवन को मधुमास बनाए।
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