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मेरी कहानी....

                
                                                         
                            आप को सुनाता हूँ एक सच्ची कहानी ,खुद की कहानी खुद मेरी जुबानी ....
                                                                 
                            
छोटी सी उम्र में ,मैं आँखों का नूर हो गया ,पढ़ने के चक्कर में आपने परिवार से दूर हो गया.....
जिस दिन गया मै हॉस्टल ऐसा मानो कि मुझसे हो खुद मेरा भगवान रूठा,जब मुझसे मेरे माँ -पापा का साथ छूटा ....
छूटे वो सारे रिश्ते जो कल तक मेरे साथ थे ,और हट गये वो जो कल तक मेरे सर पर हाथ थे ......
फिर आया समझ की मेरे माँ - पापा ये सब मेरे ही ख़ातिर तो कर रहे ,वो भी तो मेरे बिना अकेले रह रहे ......
वो तो उदास होने पर किसी के सामने कुछ कह भी नहीं सकते,मेरी तरह किसी के सामने रो भी नहीं सकते ....
पक्का ही वो उदासी छिपाना के लिए एक दूसरे से बहाना बनाते होंगे ,मेरे बिना सही से वो खाना भी नहीं खाते होंगे.....
फिर यही सब सोच कर के मैंने खुश रहना सीख लिया , कि आखिर मेरा कौन सा दुख बड़ा है जब तक मेरे साथ मेरा परिवार खड़ा है ...।।
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4 घंटे पहले

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