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वो हिंदी और उर्दू बोलते हैं

                
                                                         
                            जो कानों में मुहब्बत घोलते हैं,
                                                                 
                            
वो हिंदी और उर्दू बोलते हैं

अभी तहज़ीब ज़िंदा है जहाँ में,
यहाँ कुछ लोग उर्दू बोलते हैं

जहाँ इंसानियत मज़हब बनी हो,
वहाँ सब लोग उर्दू बोलते हैं

वफ़ा का नाम लेते हैं सदा जो,
वही सौ बार रिश्ते तोलते हैं

यहाँ हर शख़्स जल्दी में है इतना,
कहाँ अब लोग दिल से बोलते हैं

ज़रा सी बात पर नाराज़ होकर,
पुराने राज़ सारे खोलते हैं

यहां बाज़ार में बिकता है चेहरा,
यहां किरदार ख़ुद को तोलते हैं

ज़ुबाँ मीठी, मगर नीयत है कड़वी,
नहीं वो राज़ दिल के खोलते हैं

कभी आँखों से पढ़ लेते हैं दुनिया,
कभी चुप रह के सब कुछ बोलते हैं

सियासत हो, मोहब्बत हो कि दुनिया,
सभी अपनों को यारो तोलते हैं,

जहाँ में प्यार की बातें बहुत हैं,
वहीं कुछ लोग नफ़रत घोलते हैं
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6 दिन पहले

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