अपने पिता के वचन का मान रखने,
और माता की इच्छा पूरी करने के लिए,
राम जी ने त्याग दिया राज सिंहासन ,
14 वर्ष अपनी जिंदगी के वनवास में काट दिए।
जब रावण ने, मां सीता का अपहरण किया,
वानर सेना की मदद से उन्होंने एक सेतु बनाया,
लंका से था युद्ध किया, रावण का सर काट गिराया।
बुराई का नाश हुआ अच्छाई की हुई जीत,
जब राम अयोध्या लौटे दीप जलाए गए, गाए सबने गीत।
अंदर की बुराई को मारने के लिए, हम यह त्यौहार मनाते हैं,
दिए, फुलझड़ी, रॉकेट और अनार जलाते हैं ।
रंग बिरंगी आज हम रंगोली देखो बनाते हैं,
श्रद्धा से पूजा कर मां लक्ष्मी को घर बुलाते हैं।
झूम उठा देखो सारा परिवार,
बांटो उपहार और प्यार,
आज दिवाली आई है,
साथ खुशियां लाई है।
- वंशिका गुप्ता
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