यह ज़माना दबा देगा हर उस सच्ची मोहब्बत को,
तुम कभी इस रिश्ते में न करना।
कहने को तो मैं तुमसे जाने क्या-क्या कह जाऊँ,
जैसे सूखे हुए पत्तों को फिर से धागे में पिरोने लग जाऊँ।
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