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विडम्बना बाण

                
                                                         
                            वाणी मधुर विरह अश्रु
                                                                 
                            
मिलन शान्ति हयात उम्मीद
स्वप्न पुष्प भोर राकेश
दिनकर पवन हृदय नृत्य
साँस साथ साथी भी
सच्चा सहाय दम तक साथ
क्यों और .........?
प्रेमी साथ सही जीवन
दृश्य प्रकार हृदय सुमन
आकाश गगन साथ न सही
कितनी लम्बी गज़ की दूरी
इश्क़ कि पतंग कटी घना घनघोर सी
पंत रूपी आसमा से उतरी
निर्जीव रूपी चिल छपी
कल्पनाओं की दुनिया बसी
घटनाओ साथ पवन सी उम्मीद
पहाड़ो से भी ऊंची लम्बी स्वप्न
श्रृंगार वाणी फुलों की चतुराई
अलग-अलग कुसुम रूप छाई
बाण की धार हैं;
थल-जल और वायु सब मुक्त
नहीं कोई अश्रु मन।
— अभिषेक गुप्ता
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एक घंटा पहले

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