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सुबह को त्याग न कीजिए...

                
                                                         
                            बिना किसी मतभेद के देखो,
                                                                 
                            
सूर्य की चारों चालें चलती हैं।
बिखेरती हैं वो अपना प्रकाश,
जिससे ये दुनिया जीती है।

बिना प्रकाश के इस जीवन में,
कोई मार्ग न मिल पाएगा।
शोषण का यह कार्य छोड़ दो,
वृक्ष नियम से हाथ बटाएगा।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
19 घंटे पहले

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