शाम हुई,
शाम हुई।
तो चांदनी-सी,
पहले बादल ही उड़े
आकाश सारे जग में,
रोशनी-सी छाई।
जैसे किसी की,
बारात आई।
सो चुके हों,
सारे ही बाराती।
चल रही है चारों ओर,
हवा का प्यारा झोंका।
चम-चम कर चमक रही,
है चांदनी,
हैं रातें।
मौसम हो जाता है,
सुहानी रातों में।
तारों की चमक रही है,
चारों ओर उज्ज्वल प्रकाश।
चांदनी रातों में जैसे,
सब के जैसा है।
वैसे ले-ले कर सफेद चमक,
का अच्छा कोई प्रकाश।
रातों की बात अलग है,
गहना उसका बादल है।
बादल तो,
रातों की यादों में।
सजने का दिल कहता है,
बस में,
इस रातों की यादों में।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X