जानता हूँ मैं कि कोयले का वो नूर हूँ,
जिसके आगे आज सारे हीरे भी फीके लगते हैं।
बस इंतज़ार है वक़्त का जब तराशा जाऊँगा,
सरकारी जो मिल गई,
तो कोहिनूर लगूँगा!
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