धड़कनों पर रूह पर ऐसा कहर बरपाएगा।
देख लेगा जब मुझे सब कुछ सिफ़र कर जाएगा। 1
ज़िंदगी के गीत का मुखड़ा लिखा है अब तलक,
उसके आ जाने से पूरा अंतरा हो जाएगा। 2
ख़त लिखूंगा मैं शिकायत से भरे लहज़े में जब,
कुछ रहम तो खाएगा कब तक भला तड़पाएगा। 3
ज़िंदगी के इस सफर की रात काली ही सही,
वो अगर मिल जाएगा मुझको सहर दिखलाएगा। 4
काफ़िये में दिल, रदीफ ए ज़िंदगी उसको लिखा,
लब का नुक्ता डालकर सब बे बहर कर जाएगा। 5
शाम हो साक़ी भी हो प्याला भी हो महफ़िल भी हो,
हुस्न तेरा मुझको सबसे बे-ख़बर कर जाएगा। 6
हाथ छोड़ेगा वो सागर फ़िर न आने के लिए,
दोनों आंखों को मेरी बस तर बतर कर जाएगा। 7
- अभिषेक गुप्ता "सागर"
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