एक पहर बीत गया,
अब दूसरे की बारी।
नफरत पैदा कर रहे हो,
अब इसकी बारी।
इसके पैर नहीं,
नहीं है कोई नब्ज,
नफरत ढूंढती,
इसे नहीं।
तुम क्या हो,
तुम सोच रहे।
पहर न बीते,
कुछ कर लो।
भोर का उच्चतम,
कामयाब रहा है।
सुबह न खिले,
ये पहर।
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