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दक्षिणा स्वीकार है

                
                                                         
                            पुजारी जी ने कहा, "चढ़ावा!"
                                                                 
                            
हमने कहा, "चढ़ा दिया फूल।"

उन्होंने फिर पूछा, "दक्षिणा?"
हमने कहा, "दक्षिणा के लिए मेरे पास बस यह पर्स है,
इसमें सिर्फ नोट हैं।"

पुजारी जी मुस्कुराए और बोले,
"वही दे दो।"

हमने कहा,
थूक और मैल आदि ,
न जाने कितनीअपवित्र जगहों से गुज़र कर आया है ,
यह नोट...बाबा,
ईश्वर को तो सिर्फ फूल स्वीकार है, यह नोट नहीं!"
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2 महीने पहले

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