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जानवर भी कहाँ जाएँ

                
                                                         
                            रोज़ नारा हरियाली का,
                                                                 
                            
पेड़ लगाओ - पेड़ बचाओ,
दिखावटी नारे हैं,
चल रही राजनीति में।

रूठ जा रही है,
जनता सारी,
सरकार के नाम से,
दलाली चल रही है।।

लग रही आग,
सरकार खुश,
गुमराहों में,
जनता भी खुश।

मिली आज़ादी सही,
चल रही बेरोज़गारी,
खाने तक सही,
अब घर भी नहीं।।

वृक्ष लगे,
कटे लाखों,
मनुष्य हुआ बेहाल,
जानवर भी कहाँ जाएँ।।

न मुख है,
न समझने की शक्ति,
वे जानवर तो सही,
तुम क्या?!

रो रहा देश,
आज हमारा,
बिक गई ईमानदारी,
अब किसकी बारी।।

चलती रहेगी,
अंत नहीं,
सुधार करो,
संविधान ही सही।

तुम सरकार चुनो,
दलाल नहीं,
सरकार सही,
व्यक्ति नहीं।।
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9 घंटे पहले

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