आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तेरी ऊँची उड़ान

                
                                                         
                            तेरी ऊँची उड़ान
                                                                 
                            

ये सच है...
तू ज़मीं से आसमान देखेगा,
ये सारा जहाँ तेरी ऊँची उड़ान देखेगा।

ये सच है...
कुछ लोग आज भी तुझसे जलते हैं,
जो कुछ न कर पाए,
वो खुद को परेशान देखेगा।

मैं शामिल हूँ
तेरी हर खुशी और कामयाबी में,
मुझे यक़ीन है—
तू इससे भी ऊँची उड़ान देखेगा।

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर