अपने ख़िलाफ़ अपना ही किरदार न बना
मैं पुलिया बना रहा हूँ तू दीवार न बना
अपनों को भुला कर तू दूसरों से रिश्ता न बना
मैं गाँठें खोल रहा हूँ तू एक नयी गाँठ न बना
अपने दिल में एक वहमी धुन न बना
मै नयीं धुन सजा रहा हूँ तू पुरानी न बजा
अपनों से दूर रहकर अलग आशियाँ न बना
मै नींव रख रहा हूँ तू अब नयी दीवार बना
-अभय ‘अवधी’
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X