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एक कश्मकश

                
                                                         
                            अपने ख़िलाफ़ अपना ही किरदार न बना
                                                                 
                            
मैं पुलिया बना रहा हूँ तू दीवार न बना
अपनों को भुला कर तू दूसरों से रिश्ता न बना
मैं गाँठें खोल रहा हूँ तू एक नयी गाँठ न बना
अपने दिल में एक वहमी धुन न बना
मै नयीं धुन सजा रहा हूँ तू पुरानी न बजा
अपनों से दूर रहकर अलग आशियाँ न बना
मै नींव रख रहा हूँ तू अब नयी दीवार बना
-अभय ‘अवधी’
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45 मिनट पहले

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