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मेले में अब वो बात नही

                
                                                         
                            हमने जो देखा दौर
                                                                 
                            
इस दौर में वो एहसास नही
मेले में अब वो बात नही।
रौशनी कम होती थी
पर कला उत्तम होती थी
मशीनी युग में चुभती है
अब रौशनीयाँ, कर्कश
आवाज़ का सम्राज्य ही
मेले में अब वो बात नही।
घर के सदस्यों के साथ
एकजुटता का एहसास होता था
विहंगम उमंग का प्रयास होता था
इस दौर में अब वो आभास नही
मेले में अब वो बात नही।
दौर भक्ति के एक दर्शन का था
आराधना, अर्पण का भाव था
रुहँसे कल्पनात है अब
हिय में रहा जज्बात नही
मेले में अब वो बात नही।
भीड़ ही नही है सड़को पर
सुविधा भी अब भरपूर है
पर सच है कि सकूँ मगरूर है
जो देखा मैंने वो कहेंगे
अल्फाज़ यही, मेले में
अब वो बात नही।
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4 घंटे पहले

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