वक्त को हमने खूब पहचाना है
ये किसी का नहीं ये तो दीवाना है.
इसकी शाखाएं डोलती हैं इधर-उधर
यही तो इसका सही पैमाना है.
दौलत , शोहरत ,इज्जत इसके हाथों हैं
कब फेर ले पर ये नजर ये बड़ा सियाना है.
अमीर- गरीब सब इसके लिए हैं एक समान
कब किसे गिरा दे ,उठा दे जाने सब जमाना है.
अच्छे -बुरे कर्मों का रखता है हिसाब बेहतर
इसके सामने न चले फिर कोई बहाना है.
वक्त ने जिसके साथ न्याय किया हो गया अमर
नहीं तो इसका मिज़ाज बड़ा मनमाना है.
दिखाए हैं इसने सभी को ही मंजर
देवताओं का भी कहाँ इसने कहना माना है.
-आभा दवे
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