आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शिक्षक वही कहलाता है।

                
                                                         
                            शिक्षक वही कहलाता है।
                                                                 
                            

जिनके पास ज्ञान का भंडार हो,
शिष्य के प्रति समर्पण अपार हो,
उनके उज्ज्वल भविष्य की चिंता हर बार हो,
सभी को समान दृष्टि से देखता हो—

शिक्षक वही कहलाता है।

शिष्य के भीतर अच्छे गुण जगाता हो,
कौशल देकर उन्हें रोजगारपरक बनाता हो,
हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाता हो,
सही और गलत में अंतर समझाता हो—

शिक्षक वही कहलाता है।

शिष्य को सर्वगुण-संपन्न बनाता हो,
हर प्रकार के ज्ञान से परिचय कराता हो,
उसे संस्कारों से परिपूर्ण बनाता हो,
स्वयं तपकर लक्ष्य की राह दिखाता हो—

शिक्षक वही कहलाता है।

जो अज्ञान का अंधकार मिटाता हो,
जीवन में ज्ञान का दीप जलाता हो,
गिरते हुए शिष्य को संभालना सिखाता हो,
और उसे सफलता की ओर बढ़ाता हो—

शिक्षक वही कहलाता है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर