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ख़ैर   से   ही   रहा   यार  जैसा   रहा

                
                                                         
                            ख़ैर   से   ही   रहा   यार  जैसा   रहा
                                                                 
                            
ज़िन्दगी  का सफ़र  खूब उम्दा रहा

सिलसिला एक जुड़ता रहा रोज़ ही
दुश्मनी  का सही  एक  रिश्ता   रहा

राज़  रहता  नहीं   है  छुपा   देर तक
राज़ हर वक़्त के साथ खुलता रहा

कबभलारूकसका प्रेमियोंकामिलन
रास्ता खुदबखुद उनको मिलता रहा

खूब मारा गया जानता कुल जहां
ज़ुल्मसदियोंदलितफिरभीसहतारहा
-हमीद कानपुरी
 
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40 मिनट पहले

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