आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ग़ज़ल

                
                                                         
                            दूसरे  की   जो दबाई   दौलत
                                                                 
                            
वक्त पर  काम  न आई दौलत

जो विरासत  में है पाई दौलत
बे सबब जा  के उड़ाई  दौलत

नेक जिसने  न कमाई  दौलत
काम उसके नहीं आई  दौलत

फिरसमझमेंनहींआताकुछभी
आँखमें जिस केसमाई दौलत

कोईलाता नहींखातिर मेंकभी
हो  अगर  सिर्फ़ हवाई  दौलत
-हमीद कानपुरी
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर