यहां हम चैन से सोते होंगे
वहां कोई रात को जगता होगा
यहां पूरा परिवार साथ है
वहां एक सिपाही को कैसा लगता होगा
घर में सामान सब इकट्ठा कर
बाप दरवाज़े को तकता होगा
बेटे के साथ दीवाली ना मना पाने का गम
एक फौजी की मां को कैसा लगता होगा
घर के सामने से गुजरने वाला हर शख्स
उसे अपना बेटा लगता होगा
नफरतें अगर इसी तरह रही
फसाद की आग में देश जलता होगा
अमन की रौशनी चमकेगी अब्दुल
सारा देश पड़ लिखकर आगे बढ़ता होगा
-अब्दुल बासित
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