आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वृक्ष का समर्पण

                
                                                         
                            चमकती सूरज की धूप ने जिसे बड़ा किया और पाला
                                                                 
                            
जिसने हमें अपना सब कुछ दे डाला,और बन गया हम सबके जीवन का रखवाला।
है वो ऐसी मा का बेटा , जिसने सबको अपने आंचल में समेटा।
जिसकी गोद में है पक्षियों का बसेरा, उसी ने किया हम सबके जीवन में सवेरा।
जो बादलों को वश में कर ,बारिश करवाता है
सबको सुख संपन्नता से भीगाता है।
जिसे है कुछ लेने से इंकार, जो हम पर लुटाता अपने बहुमूल्य रत्न बार बार।
जिसने मिट्टी के कटाव को रोक दिया, अन्न ग्रह तथा जल हमे दिया।
जिसने अनेक पशुओं को आश्रय दिया, मिट्टी के कटाव को रोक दिया।
उसे ही समझ लिया हमने अपना सबसे बड़ा दुश्मन, जिसने अत्यधिक सरल कर दिया जन जीवन।
जरूरी है दिखाना मनुष्य को सत्य का दर्पण
उसे समझाना वृक्ष का समर्पण।
ऐसा कर हम कैसे बच पाएंगे, प्रकृति की सबसे बड़ी देन को मिटा कर सर्वश्रेष्ठ हम कैसे कहलाएंगे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर