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तेरी यादों के हसीन सहारे ले कर

                
                                                         
                            तेरी यादों के हसीन सहारे ले कर!
                                                                 
                            
नींद आती है ख़्वाब तुम्हारे ले कर!!

तेरा फ़लक हूॅं मैं मगर सूना सूना!
तुम आ जाओ चाॅंद सितारे ले कर!!

तोहफ़ा ख़ुशियों का वो भी मेरे लिए!
अब कोई नहीं आएगा प्यारे ले कर!!

बीच भॅंवर में ग़र्क़ हमें कर देते!
क्यूॅं आ गए तुम हम को किनारे ले कर??

बे-रंग ज़िंदगी में रंग भरने के लिए!
आ गए महबूब रंग सारे ले कर!!

इतनी जल्दी क्यूॅं मूॅंद लीं ऑंखें तू ने?
कौन आया है देख! नज़ारे ले कर!!

राह-ए-वफ़ा में आग पे चलना होगा!
वो आए हैं 'परवेज़' अंगारे ले कर!!

- आलम-ए-ग़ज़ल परवेज़ अहमद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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