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कौन है वो

                
                                                         
                            मैने उसे देखा तो उसकी आँखों मे डर था कुछ तो खोने का।
                                                                 
                            
और उस डर के उपर थी खुशी कुछ पाने की कुछ मिल जाने की
जिसके लिए वो जी रहा था
इतने दिनों से या फिर जी नही पा रहा था
उसके बिना कुछ तो था वरना आँखों से आँशु वैसे ही नही आते ।
कुछ तो था वरना होठ वैसे ही नही कपकपाते
उसकी आँखे के रही थी कि किसी चीज के लिए तो वो जागा है ।
अपने समय से अपनी किस्मत से और और माथे की लकीरों से भागा है।
वो ऐसा ही दिखा मुझे क्योंकि आईना कम साफ था और इतनी देर से जिसके दुखो को गिना रहा हु वो मैं अपनेआप था।
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2 महीने पहले

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