प्यार में सौ उलझनें हैं, सौ सवालात भी हैं,
कुछ अधूरी सी मुलाक़ातें, कुछ ख़ामोश रात भी हैं।
कभी आँखों में चमक है, कभी दिल बेकरार है,
कभी मिलने की ख़ुशी है, कभी बिछड़ने का ख़ुमार है।
कभी रूठना, कभी मनाना, यही इश्क़ की रवायत है,
कभी दर्द की बारिश है, कभी चाहत की इनायत है।
सौ उलझनों के बावजूद, ये दिल हारता नहीं,
मोहब्बत का सफ़र मुश्किल सही, मगर ठहरता नहीं।
जो इश्क़ को समझ बैठे, वो शायद आशिक़ नहीं,
प्यार में सौ उलझनें न हों, तो वो मोहब्बत नहीं।
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