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पुराना घर और टूटी दीवारें

                
                                                         
                            उस पुराने घर की दीवारों में,
                                                                 
                            
आज भी कुछ आवाज़ें रहती हैं,
जहाँ कभी हँसी गूँजती थी,
वहाँ अब ख़ामोशियाँ बहती हैं।

टूटी हुई छत से चाँद झाँकता है,
जैसे कोई अपना लौटने की आस रखता है,
हर दरार में एक कहानी दबी है,
हर कमरे में कोई याद खड़ी है।

वक़्त ने घर को खंडहर कर दिया,
मगर यादों को कहाँ मिटा पाया,
कुछ रिश्ते भी इस घर जैसे थे,
टूट गए, मगर दिल से न जा पाए।

अब वहाँ कोई रहता नहीं,
फिर भी दिल अक्सर चला जाता है,
जिस घर में कभी हम साथ थे,
वो आज भी हमें बुलाता है।

 
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2 घंटे पहले

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