छू ले ना कोई जज़्बातों से भरी इन आँखों को...
सुना है ये आँखें, बिना बोले बहुत कुछ कह जाती हैं...
इन पलकों के पीछे भी एक कहानी ठहरी है,
कुछ ख़्वाहिशें अधूरी, कुछ यादें गहरी हैं...
कभी गौर से पढ़ना इन ख़ामोश निगाहों को,
हर आँसू के पीछे एक दास्ताँ छुपी है...
लफ़्ज़ों में कहाँ कह पाते हैं हम अपना दर्द,
ये आँखें ही हैं जो चुपके से सब कह जाती हैं...
बस कोई समझने वाला चाहिए इन ख़ामोशियों को,
वरना आँखें तो हर किसी के सामने नम हो जाती हैं...
और जो पढ़ ले इन्हें, वो फिर सवाल नहीं करता,
इन आँखों में छुपे दर्द का हिसाब नहीं करता...
क्योंकि कुछ दर्द ऐसे होते हैं,
जो कहे नहीं जाते...
सिर्फ़ आँखों में उम्रभर
ठहरे रह जाते हैं...
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X