कुछ ख्याल देखें
ज़िन्दगी को सबक सिखाने दे
मौत थोड़ा करीब आने दे
लग रही है हवा चरागों को
थम जरा चिटकिनी लगाने दे
कर रहें है शहर मे दंगा जो
कौन मज़हब जरा बताने दे
वो मुझे घर नहीं बुलाता है
पर उसे घर मुझे बुलाने दे
वो मिरा हमसफ़र न हो पाया
चल उसे हमसफ़र बनाने दे
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