बहुत हुनर है अभी जमाने को दिखाने के लिए
फिर भी लोग बैठे है हमें आजमाने के लिए।
पछता रहा हूं अपने दिल का मुस्तकिल पता बता कर
गलती कर दी है अपने ज़ख्मों को दिखा कर।।
लोग बैठे है उस पर नमक लगाने के लिए
बहुत हुनर है अभी जमाने को दिखाने के लिए
हमें मालूम है ये लोग चेन से जीने नहीं देंगे
न मेरे हालात पर रहने देंगे न मरने देंगे।
गलती मेरी ही है कि इनको सुन रहा हूं
इनके सामने ही अपने आप को बुन रहा हूं ।।
कोई नहीं आया है अच्छा सिखाने के लिए
बहुत हुनर है अभी जमाने को दिखाने के लिए
हमें मालूम है ये लोग खुश नहीं रहने देंगे
न अच्छा बताएंगे न किसी को कुछ कहने देंगे ।
पीठ पीछे ही चलाएंगे छुरियां अपनी बातों की
गलत साबित करने में लगा देंगे मेहनत दिन ओर रातों की ।।
इस लिए सीखने निकला हूं खुद को बचाने के लिए
बहुत हुनर बाकी है जमाने को दिखाने के लिए
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X