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क्या मैं खिलौना हूँ ?

                
                                                         
                            एक पल प्यार करते हो,
                                                                 
                            
एक पल नज़रअंदाज़ करते हो,
जैसे लगता है खिलौना हूँ,
इस तरह बेकार रखते हो।

कुछ पल ढलेंगे,
फिर मैं ही याद आऊँगा,
जो आज तुम्हारी आदत हूँ,
कल तुम्हारी ज़रूरत बन जाऊँगा।

तुम हँसकर टाल दोगे मेरी बातें,
पर रातों में मेरा ख़याल आएगा,
जिसे आज तुम समझ नहीं पाते,
वही कल सबसे ज़्यादा याद आएगा।

फिर शायद तुम पुकारोगे मुझे,
और मैं खामोश रह जाऊँगा,
क्योंकि जिस दिल को तुमने खेल समझा,
वो एक दिन खेलना छोड़ जाएगा।
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2 महीने पहले

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