कहाँ गई वो लड़की,
जो छोटी-छोटी बातों में खुशियाँ ढूँढ़ लिया करती थी?
कहाँ गई वो लड़की,
जो अनगिनत सपने संजोया करती थी?
कहाँ गई वो लड़की,
जो घंटों किताबों में खोई रहती थी?
कहाँ गई वो लड़की,
जो आईने से रोज़ बातें किया करती थी,
मगर तक़दीर से कभी कोई शिकायत नहीं किया करती थी।
कहाँ गई वो लड़की,
जो अपनी डायरी के हर पन्ने पर अपने जज़्बात उतार दिया करती थी?
कहाँ गई वो लड़की,
जो बिना वजह मुस्कुरा दिया करती थी?
कहाँ गई वो लड़की,
जो हर हार के बाद फिर से खड़ी हो जाया करती थी?
कहाँ गई वो लड़की...
जो कभी मैं हुआ करती थी?
जो कभी मै हुआ करती थी?
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