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कभी तो तुम आओगी सितमगर

                
                                                         
                            कुछ ख़्वाहिशें, ख़्वाहिशें ही रह गई
                                                                 
                            
सजाएं गए सपने अधूरे रह गए,
उन चांदनी रातों की खताएं क्या थी?
जो कल तक मेरे थे,
वो आज न है मेरे!!

मेरे दिल का कमरा आज भी ख़ाली है
वहां इक कोना रोने के लिए है,
बैठ के वहां पे,
जब बिखरे हुऐ ख़्वाब देखता हूं,
मेरे माशूक़ तेरे वापस आने की,
इक आस देखता हूं!

ग़म तो हमें पहले ही बहुत थे
जो तुमनें दिए वो दफ़न होंगे कफ़न के साथ!
वादे किए ही क्यों जब निभाने न थे??
आए ही क्यों जब जाना था?
ये दिल कोई खिलौना है जो तुम खेल गये?
मासूम बन के मार हमें जो गये!!

अब तो रातें भी लम्बी लगती हैं
एक वक़्त तो बातें भी लम्बी थी,
वो बाते वो रातें अब तो यादें ही रह गई है
ताक रहा हूं वो राहें
कभी तो तुम आओगी सितमगर!
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46 मिनट पहले

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