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स्मृति शेष- शैलेंद्र: साधारण शब्दों के साथ आम आदमी की आवाज...

shailendra a memorable lyricist always for me
                
                                                         
                            
प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त 1923 को रावलपिंडी, पाकिस्तान में हुआ था। निधन मुंबई में 14 दिसंबर 1966 को हुआ। शैलेंद्र साधारण से शब्दों के साथ आम आदमी की आवाज थे। पूरे करियर में एक से बढ़कर एक गीत लिखे। शैलेंद्र राजकपूर के मनपसंद गीतकार रहे।

हिंदी फ़िल्मों के गीतों में मुश्किल से मुश्किल और पेचीदे भाव को सरल शब्दों में अगर किसी ने बेहतरीन अंदाज़ में कहा है तो वो सिर्फ एक नाम है, शैलेंद्र। शैलेंद्र ज़िंदगी को मुश्किल बनाने के हिमायती नहीं रहे बल्कि उन्होंने अपने गीतों में ज़िंदगी को आसान और सहज ही बनाए रखा। किसी फ़नकार की शख़्सियत कैसी थी और उसका फ़न किस दर्जे का था? अगर इसका अंदाज़ा लगाना हो, तो उस फ़नकार के समकालीनों की राय उसके बारे में काफ़ी मायने रखती है।

राज कपूर की वजह से हिंदी सिनेमा में आए शैलेंद्र

राज कपूर वो शख़्स थे, जिनकी वजह से हिंदी सिनेमा को शैलेंद्र जैसा गीतकार मिला। दरअस्ल, अगस्त 1947 में एक कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें राज कपूर भी शरीक हुए थे। राज कपूर शैलेंद्र सुनकर इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने शैलेंद्र को अपनी फ़िल्म 'आग' में गीत लिखने के लिए कहा। लेकिन अपने उसूलों पर ज़िंदगी जीने वाले शैलेंद्र ने राज कपूर के इस ऑफर को ठुकरा दिया। इप्टा के सदस्य रहे शैलेंद्र को फ़िल्मी दुनिया के लोग पसंद नहीं थे। मगर क़िस्मत को कुछ और ही मंजूर था और एक वक़्त हालात ऐसे हो गए कि उन्हें पैसे की ज़रूरत आन पड़ी। 

शैलेंद्र का गीत सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी...आज भी लोगों की ज़बान पर है। इस गीत के बोल बहुत ही ख़ूबसूरत तरीक़े से लिखे गए हैं। इस गीत के हर लफ़्ज़ से मैं खु़द को जु़ड़ा महसूस पाता हूं। ऐसा लगता है जैसे शैलेंद्र ने यह गीत मेरे लिए ही लिखा हो। इंसानों के एहसासात और दर्द को जिस तरह शैलेंद्र ने अपने गीतों में पिरोया है, वही उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत है। उन्होंने कभी समाज और विपरीत हालात से मुंह नहीं मोड़ा बल्कि उनका डटकर सामना किया। हालांकि, यह गीत 'अनाड़ी' फ़िल्म का है, लेकिन जाने मुझे क्यों लगता है जैसे शैलेंद्र ने अपने संघर्ष के दिनों को इस गीत के शब्दों में पिरो दिया है....
 
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राज कपूर की वजह से हिंदी सिनेमा में आए शैलेंद्र

7 वर्ष पहले

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