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दिलों का अज़ीज़, लहजे से लज़ीज़ और वक्त का ज़दीद शायर

दिलों का अज़ीज़, लहजे से लज़ीज़ और वक्त का ज़दीद शायर।
                
                                                         
                            [यह लेख नई दिल्ली से अभिनव 'अभिन्न' ने लिखा है]
                                                                 
                            

सभी की ज़िन्दगी में प्रीत की ये रीत होती है
ज़रा-सी हार होती है, ज़रा-सी जीत होती है
किसी का गीत होता है किसी की ज़िन्दगानी पर
किसी की ज़िन्दगानी ही किसी का गीत होती है
(हमें तुम गुनगुनाओगे : गीत संग्रह)


ये पंक्तियां हैं हिंदी के युवा और मशहूर शायर और कवि डाॅ. राहुल अवस्थी की। न केवल  राहुल जी के गीतों में ही, वरन् उनकी अन्य रचनाओं में भी आपको हिंदी छंदशास्त्र के विविध विधान मिलेंगे। साहित्य के सर्वमान्य ग्यारह के ग्यारहों रस में उनकी रचनाएं हैं। राममंदिर आंदोलन से फूटी उनकी पद्य रचना हो, जो अपने समय का आईना आगत को दिखा रही हो या फिर संविधान की आत्मा के माध्यम से भारत के जनमानस से संवाद करती उनकी बीसों पृष्ठ की लंबी रचना, सारी रचनाएँ अनूठी हैं। कोई भी कविता क्यों न हो, ज़रा से में ही राहुलजी हर विषय को छू निकलते हैं। आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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