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नीरज ने बताया- बिना प्यार के, बिना गीतों के यह जीवन सिसकते आंसुओं का कारवां भर है

गोपालदास ‘नीरज’ यानि गीत गगन का ध्रुवतारा...
                
                                                                                 
                            [यह लेख बक्सर से पंकज भारद्वाज ने लिखा है]
                                                                                                


गीत जब मर जाएंगे फिर क्या यहां रह जाएगा
एक सिसकता आंसुओं का कारवां रह जाएगा।
प्यार की धरती अगर बंदूक से बांटी गई
एक मुरदा शहर अपने दरमियां रह जाएगा।


ये पंक्तियां हिंदी के यशस्वी कवि और गीत ऋषि गोपालदास नीरज ने लिखी थीं। दरअसल, वे प्रेम के सच्चे पुजारी थे और इसकी अहमियत से दुनिया को वाकिफ भी कराया। उन्होंने बताया कि बिना प्यार के, बिना गीतों के यह जीवन सिसकते आंसुओं का कारवां भर रह जाता है। यही वजह रही कि वे आखिरी सांस तक गीत रचते रहे और गाते रहे। एक ही ख़्वाहिश रही कि जब सांसें साथ छोड़ें तब भी होठों पर कोई खू़बसूरत नगमा हो। वे तमाम उम्र प्रेम की भाषा में ही बात करते रहे और इसी को अपनी रचनाओं का मूलाधार बनाया। उन्होंने हिंदी कविताओं को तो नया सौंदर्य दिया ही, हिंदी सिनेमा के गीतों को भी सतरंगी छटा से भर दिया। ऐसे-ऐसे गीत गढ़े, जो बरसों बाद भी लोगों की ज़ुबान पर हैं और रहेंगे। 

मंचों और महफ़िलों की शान रहे गोपालदास नीरज को गीत गगन का ध्रुवतारा कहें, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। वे ऐसी इकलौती शख्सियत थे, जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में दो बार पद्म पुरस्कार दिया गया। भारत की सरकार ने एक बार उन्हें पद्मश्री से नवाजा तो दूसरी बार पद्मभूषण से। हिंदी सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ गीतकार के रूप में तीन बार 'फिल्मफेयर पुरस्कार' मिला सो अलग। आगे पढ़ें

1 month ago

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