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विश्व नींद दिवस: पढ़िए चुनिंदा शेर....

विश्व नींद दिवस: पढ़िए चुनिंदा शेर....
                
                                                         
                            इश्क़ में नींद नहीं आती, सपने आते हैं, पता नहीं चलता कि जागती आंखों में सपने कैसे आते हैं। शायरी में नींद आने और न आने को शायरों ने विभिन्न एहसासों में ढाला है। पेश है 'नींद' पर बेहतरीन शेर..
                                                                 
                            

अब आओ मिल के सो रहें तकरार हो चुकी 
आँखों में नींद भी है बहुत रात कम भी है 
- निज़ाम रामपुरी

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए 
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए 
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

बिन तुम्हारे कभी नहीं आई 
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है 
- जौन एलिया

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई 
हम न सोए रात थक कर सो गई 
- राही मासूम रज़ा

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे 
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो 
- राहत इंदौरी

शाम से उन के तसव्वुर का नशा था इतना 
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है 
- अज्ञात
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5 वर्ष पहले

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