यूनेस्को ने पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए 1966 में आज ही के दिन यानी 8 सितंबर को साक्षरता दिवस मनाने की शुरुआत की थी। साक्षरता दिवस पर अक्षर और पढ़ाई पर ये 10 बड़े शेर पाठकों के लिए...
जरूरी नहीं रौशनी चिरागों से हो
शिक्षा से भी घर रौशन होते हैं
-कहावत
उस के बाद तो जो कुछ है...
एक चराग़ और एक किताब और एक उम्मीद असासा
उस के बाद तो जो कुछ है वो सब अफ़्साना है
-इफ़्तिख़ार आरिफ़
बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो
-ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
किताब का न कोई दर्स मोतबर निकला
हर इक क़यास हक़ीक़त से दूर-तर निकला
किताब का न कोई दर्स मोतबर निकला
-फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
चेहरा खुली किताब है उनवान जो भी दो
जिस रुख़ से भी पढ़ोगे मुझे जान जाओगे
-अज्ञात
हर किसी को अपने ज्ञान का अभिमान तो होता हैं,
असली ज्ञान वही है जिसे अपने अभिमान का ज्ञान होता है…
-कहावत
पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय
-कबीर
किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं
अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश
-अज्ञात
जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
-ज़फ़र सहबाई
किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को
काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
-आदिल मंसूरी
ऐसी कोई करें पढ़ाई,
जिससे कोई ना जी चुराए।
नई-नई हों बातें उसमें,
सारी बातें मन को भाएँ।
बोझ हमें क्यों लगे पढ़ाई,
मन कभी भी टिक ना पाए।
कितना कुछ भी याद करें हम,
फुर्र से गायब हो जाए।
दे कोई ऐसा ज्ञान हमें भी
मन की गाँठें खुलती जाएँ।
जिज्ञासा हो शान्त सभी की,
भीतर का तम मिटता जाए।
मिलकर ऐसी करें पढ़ाई,
सबका मन ललचाता जाए।
फिर कुछ करेंगे जग की खातिर
सबका घर रोशन हो जाए।।
आगे पढ़ें
उस के बाद तो जो कुछ है...
कमेंट
कमेंट X