उस ने भूले से क्या नज़र डाली
उम्र सारी ख़राब कर डाली
- अज्ञात
तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
- सलीम कौसर
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है
- जोश मलीहाबादी
गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा
लौट कर न देखूँगा चल पड़ा अगर तन्हा
- अनवर शऊर
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